
आदिवासी वारली सेवा संस्था ने सौंपा ज्ञापन; आदिवासी समाज की संस्कृति को उचित सम्मान देने की मांग
उमरगाम: उमरगाम टाउन स्थित नगर पालिका के सार्वजनिक शौचालय की दीवारों पर आदिवासी समाज की पारंपरिक पहचान मानी जाने वाली वारली पेंटिंग बनाए जाने को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा और असंतोष का माहौल देखने को मिला। वारली कला आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा, जीवनशैली और पूर्वजों की अमूल्य विरासत का प्रतीक है। ऐसे में इस कला को सार्वजनिक शौचालय की दीवारों तक ही सीमित रखने को लेकर कई सवाल उठाए गए।
इस मामले को लेकर दिनांक 03/11/2026 को आदिवासी वारली सेवा संस्था (अखिल भारतीय) द्वारा आदिवासी समाज के अग्रणियों की उपस्थिति में उमरगाम नगर पालिका को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि वारली कला की गरिमा और सम्मान बनाए रखा जाए तथा आदिवासी समाज की भावनाओं का ध्यान रखा जाए।
आदिवासी समाज के अग्रणियों ने सवाल उठाया कि उमरगाम नगर पालिका द्वारा वारली पेंटिंग के लिए सार्वजनिक शौचालय की दीवारों को ही क्यों चुना गया? जबकि शहर में बगीचे, सार्वजनिक उद्यान, सांस्कृतिक केंद्र और अन्य सरकारी भवन जैसी कई जगहें उपलब्ध हैं। इसके बावजूद आदिवासी कला को ऐसी जगहों पर स्थान क्यों नहीं दिया गया?
इस संबंध में ज्ञापन दिए जाने के बाद उमरगाम नगर पालिका द्वारा सार्वजनिक शौचालय की दीवारों से वारली पेंटिंग के चित्र हटा दिए गए। हालांकि, इस घटना के बाद नगर पालिका की निर्णय प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल
उमरगाम विधानसभा क्षेत्र के विधायक आदिवासी समाज से आते हैं। वहीं उमरगाम नगर पालिका, तालुका पंचायत और जिला पंचायत के निर्वाचित प्रतिनिधियों की इस मामले में क्या भूमिका रही और उन्होंने आदिवासी समाज की भावनाओं को लेकर क्या विचार व्यक्त किए, इस विषय पर भी चर्चा हो रही है।
वारली कला को गौरवपूर्ण स्थान देने की मांग
वारली पेंटिंग केवल चित्रकला नहीं है, बल्कि यह आदिवासी समाज की पहचान, परंपरा और गौरव का प्रतीक है। इस कला को शैक्षणिक संस्थानों, सांस्कृतिक केंद्रों, सार्वजनिक उद्यानों और अन्य उचित सार्वजनिक स्थानों पर प्रोत्साहन एवं सम्मानजनक स्थान दिया जाना चाहिए।
आदिवासी समाज की भावनाओं और सांस्कृतिक विरासत को ध्यान में रखते हुए उमरगाम नगर पालिका से अपेक्षा की गई है कि वह इस पूरे मामले पर आधिकारिक स्पष्टीकरण दे और भविष्य में वारली कला को उचित एवं गौरवपूर्ण स्थान प्रदान करे।
संस्कृति का सम्मान केवल चित्र बनाने से नहीं, बल्कि उसकी गरिमा और पहचान को बनाए रखने से होता है।


