एवरेस्ट मसाला कंपनी पर खाद्य सुरक्षा को लेकर सवाल, जीरा पाउडर की एक बैच वापस मंगाने का आदेश

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  • उमरगाम स्थित उत्पादन इकाई में बने हींग उत्पादों के नमूने भी मानकों पर खरे नहीं उतरे; आसपास के इलाकों में मसालों की गंध फैलने से लोगों को परेशानी होने की शिकायत
  • भारतीय रसोई में व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाले एवरेस्ट मसाला ब्रांड के कुछ उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की कार्रवाई के बाद खाद्य सुरक्षा का मुद्दा चर्चा में है। अक्टूबर 2026 में एवरेस्ट के पैकबंद जीरा पाउडर की एक विशेष बैच को असुरक्षित घोषित किए जाने के बाद बाजार से वापस मंगाने का आदेश दिया गया। इससे पहले अगस्त 2026 में कंपनी के कंपाउंडेड हींग उत्पादों के नमूने निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए थे।इसी बीच, गुजरात के उमरगाम स्थित एवरेस्ट मसाला कंपनी के आसपास के क्षेत्र में मसालों की तेज गंध हवा के साथ फैलने और स्थानीय लोगों को परेशानी होने की शिकायत भी सामने आई है। इस शिकायत के संबंध में वायु गुणवत्ता की जांच, गंध के स्रोत और कंपनी की प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था से जुड़ी आधिकारिक रिपोर्ट उपलब्ध होना जरूरी है, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

जीरा पाउडर की एक बैच में कीटनाशकों के अवशेष निर्धारित सीमा से अधिक

 

अक्टूबर 2026 में सामने आई जानकारी के अनुसार, गोवा के रिवरसाइड रिसॉर्ट्स एंड हॉलिडे होम्स प्राइवेट लिमिटेड के परिसर से एवरेस्ट के पैकबंद जीरा पाउडर का नमूना लिया गया था।
खाद्य विश्लेषक की जांच में एजोक्सीस्ट्रोबिन (Azoxystrobin) और थायामेथोक्साम (Thiamethoxam) नामक कीटनाशकों के अवशेष निर्धारित अधिकतम सीमा से अधिक पाए गए। इसके बाद नमूने को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत असुरक्षित घोषित किया गया।
कंपनी को प्रारंभिक रिपोर्ट के विरुद्ध अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया था। इसके बाद नमूने को रेफरल फूड लेबोरेटरी में भेजा गया, जहां जांच में भी नमूना असुरक्षित पाया गया।
इसके आधार पर FSSAI ने संबंधित उत्पाद की पूरी प्रभावित बैच को बाजार से तत्काल वापस मंगाने का निर्देश दिया।
प्रभावित उत्पाद की बैच संख्या: E080668761
यह कार्रवाई एक विशेष बैच से संबंधित है। इससे एवरेस्ट के सभी मसालों को असुरक्षित घोषित करना उचित नहीं होगा

उमरगाम में निर्मित हींग के नमूने गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे

29 अगस्त 2026 को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, FSSAI ने एवरेस्ट फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और एलजी ब्रांड की कंपाउंडेड हींग की गुणवत्ता को लेकर बिक्री पर रोक लगाने के आदेश जारी किए थे।
FSSAI ने गुजरात राज्य के FDA के साथ मिलकर उमरगाम स्थित एवरेस्ट की राज्य-लाइसेंस प्राप्त उत्पादन इकाई में निरीक्षण और नमूने लेने की कार्रवाई भी की थी।
प्रयोगशाला में जांचे गए कंपाउंडेड हींग के नमूनों में अल्कोहल-सॉल्युबल एक्सट्रैक्ट की मात्रा निर्धारित न्यूनतम 5 प्रतिशत के मुकाबले केवल 0 से 3 प्रतिशत तक पाई गई। प्राधिकरण के अनुसार, यह निर्धारित मानकों से कम थी।
कंपाउंडेड हींग में कच्ची हींग के साथ अन्य अनुमत सामग्री मिलाई जाती है। लागू मानकों के अनुसार, तैयार उत्पाद में अल्कोहल-सॉल्युबल एक्सट्रैक्ट की मात्रा कम से कम 5 प्रतिशत होनी चाहिए।
इन निष्कर्षों के बाद संबंधित हींग उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए गए। कंपनियों को सुधारात्मक कार्ययोजना प्रस्तुत करने और बाजार में मौजूद मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए उत्पादों को स्वैच्छिक रूप से वापस मंगाने की सलाह भी दी गई।
यहां स्पष्ट करना जरूरी है कि बिक्री पर रोक संबंधित कंपाउंडेड हींग उत्पादों के लिए थी, न कि एवरेस्ट के सभी मसालों के लिए

कंपनी के आसपास मसालों की गंध फैलने से लोगों को परेशानी की शिकायत

उमरगाम स्थित एवरेस्ट मसाला उत्पादन इकाई के आसपास रहने वाले लोगों को मसालों की तेज गंध से परेशानी होने की शिकायत भी सामने आई है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि उत्पादन प्रक्रिया के दौरान हवा में फैलने वाली गंध को नियंत्रित करने के लिए कंपनी में किस प्रकार की व्यवस्था की गई है।
यदि उत्पादन इकाई से निकलने वाली गंध आसपास के आवासीय क्षेत्रों तक पहुंच रही है, तो इसकी वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए संबंधित प्रदूषण नियंत्रण अधिकारियों द्वारा स्थल निरीक्षण और आवश्यक तकनीकी जांच किया जाना महत्वपूर्ण है।
इस संबंध में कुछ प्रमुख बिंदुओं की जांच आवश्यक है:
क्या उत्पादन इकाई से मसालों की धूल या गंध आसपास के क्षेत्रों में फैल रही है?
क्या कंपनी में धूल और गंध को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त उपकरण तथा व्यवस्था मौजूद हैं?
क्या गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (GPCB) ने इस संबंध में निरीक्षण किया है?
यदि स्थानीय लोगों की शिकायतें प्राप्त हुई हैं, तो उन पर क्या कार्रवाई की गई?
क्या कंपनी की मौजूदा प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था निर्धारित शर्तों के अनुरूप है?
फिलहाल, इस शिकायत के समर्थन में स्वतंत्र वायु गुणवत्ता परीक्षण, आधिकारिक निरीक्षण रिपोर्ट या संबंधित विभाग का निष्कर्ष उपलब्ध नहीं है। इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि कंपनी ने प्रदूषण संबंधी नियमों का उल्लंघन किया है। हालांकि, स्थानीय लोगों की परेशानी को देखते हुए संबंधित विभाग से निष्पक्ष जांच की मांग की जा सकती है।

खाद्य सुरक्षा और स्थानीय पर्यावरण—दोनों की जांच जरूरी

एवरेस्ट के कुछ उत्पादों को लेकर FSSAI की कार्रवाई और उमरगाम इकाई के आसपास मसालों की गंध फैलने की शिकायत दो अलग-अलग विषय हैं। खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता की जांच खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में आती है, जबकि औद्योगिक इकाई से निकलने वाली धूल, गंध और वायु प्रदूषण से जुड़े पहलुओं की जांच गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा संबंधित प्राधिकरण कर सकते हैं।
ऐसे में संबंधित विभागों को उपलब्ध शिकायतों और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच करनी चाहिए। साथ ही, कंपनी का पक्ष भी सामने आना जरूरी है, ताकि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

संबंधित विभागों से जांच की मांग

उमरगाम स्थित एवरेस्ट उत्पादन इकाई के संदर्भ में खाद्य सुरक्षा विभाग और गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से निम्न बिंदुओं पर जानकारी मांगी जा सकती है:
उत्पादन इकाई के खाद्य सुरक्षा लाइसेंस तथा हालिया निरीक्षण की स्थिति।
हींग और जीरा पाउडर से संबंधित कार्रवाई के बाद कंपनी द्वारा उठाए गए सुधारात्मक कदम।
इकाई के आसपास मसालों की गंध फैलने की शिकायतों पर प्राप्त शिकायतों और की गई कार्रवाई का विवरण।
गंध और धूल को नियंत्रित करने वाली व्यवस्था के निरीक्षण तथा वायु गुणवत्ता परीक्षण की रिपोर्ट, यदि ऐसी जांच की गई हो।

एवरेस्ट के कुछ उत्पादों के संबंध में FSSAI की कार्रवाई आधिकारिक जानकारी से पुष्ट होती है। वहीं, उमरगाम स्थित कंपनी के आसपास मसालों की गंध से लोगों को परेशानी होने का मुद्दा स्थानीय शिकायत के रूप में सामने आया है, जिसकी पुष्टि के लिए विभागीय जांच जरूरी है। खाद्य सुरक्षा और स्थानीय नागरिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए संबंधित अधिकारियों को तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए।

नवोदित विचार समाचार
*जनहित, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही की मांग।*

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