वलसाड के वापी स्थित मेरिल डायग्नोस्टिक्स पर WHO की गंभीर टिप्पणी!

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मलेरिया और HIV टेस्ट किट की गुणवत्ता पर उठे सवाल: WHO ने जारी किया ‘Alert ऑफ कंसर्न’, प्रीक्वालिफाइड उत्पादों की सूची से हटाए गए संबंधित उत्पाद

वापी स्थित दो विनिर्माण इकाइयों के ऑडिट में गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली में गंभीर खामियां सामने आईं; भारतीय स्वास्थ्य एवं चिकित्सा उपकरण नियामक तंत्र से भी जांच की मांग

 

गुजरात के वलसाड जिले के वापी में चिकित्सा जांच उपकरणों के क्षेत्र में कार्यरत मेरिल डायग्नोस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड (Meril Diagnostics Pvt. Ltd.) से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय नियामक मामला सामने आया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा कंपनी की निर्धारित विनिर्माण इकाइयों में किए गए ऑडिट के दौरान गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली में गंभीर गैर-अनुरूपताएं (Critical Nonconformities) दर्ज की गईं। इसके बाद WHO ने कंपनी के संबंध में ‘नोटिस ऑफ कंसर्न’ (Notice of Concern—NOC) जारी किया।
यह मामला केवल किसी कंपनी की आंतरिक विनिर्माण व्यवस्था तक सीमित नहीं है। मलेरिया और HIV जैसी गंभीर बीमारियों की त्वरित जांच के लिए इस्तेमाल होने वाली टेस्ट किट की विश्वसनीयता, मरीजों की सुरक्षा और चिकित्सा जांच उपकरणों के गुणवत्ता मानकों से भी इसका सीधा संबंध है।
ऐसे में वापी स्थित संबंधित विनिर्माण इकाइयों के संबंध में भारत के सक्षम स्वास्थ्य एवं चिकित्सा उपकरण नियामक अधिकारियों द्वारा आधिकारिक समीक्षा किया जाना सार्वजनिक स्वास्थ्य के हित में महत्वपूर्ण है।

 

WHO के आधिकारिक दस्तावेज में क्या सामने आया?
WHO के प्रीक्वालिफिकेशन विभाग ने 19 दिसंबर 2025 को मेरिल डायग्नोस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड के संबंध में नोटिस ऑफ कंसर्न प्रकाशित किया था। इसके बाद 16 मार्च 2026 को WHO ने संबंधित इन विट्रो डायग्नोस्टिक (IVD) उत्पादों के संबंध में एक अलग सूचना भी जारी की।
WHO के अनुसार, कंपनी की वापी स्थित निर्धारित विनिर्माण इकाइयों का ऑडिट 14 से 16 अक्टूबर 2025 के बीच किया गया था। यह ऑडिट सामान्य नियमित निरीक्षण के बजाय विशिष्ट चिंताओं अथवा संभावित गैर-अनुपालन के संकेतों को ध्यान में रखते हुए किया गया था।
जांच के दौरान गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली में गंभीर खामियां दर्ज की गईं। WHO ने बताया कि इन गैर-अनुरूपताओं से संबंधित उत्पादों का इस्तेमाल करने वाले मरीजों की सुरक्षा के लिए जोखिम उत्पन्न हो सकता है।
इन निष्कर्षों के बाद WHO ने नोटिस ऑफ कंसर्न जारी किया। संगठन की जानकारी के अनुसार, संबंधित उत्पादों के संबंध में यह नोटिस तब तक प्रभावी रहेगा, जब तक WHO को यह संतुष्टि नहीं हो जाती कि इन विट्रो डायग्नोस्टिक उत्पादों के प्रीक्वालिफिकेशन से संबंधित सभी लागू आवश्यकताओं को पूरा कर लिया गया है।
महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण: WHO की यह कार्रवाई निर्धारित विनिर्माण इकाइयों और संबंधित डायग्नोस्टिक उत्पादों से जुड़ी है। इसे मेरिल समूह के सभी उत्पादों पर दुनिया भर में प्रतिबंध के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।

किन टेस्ट किटों को लेकर चिंता जताई गई?
16 मार्च 2026 को जारी सूचना में WHO ने मेरिल डायग्नोस्टिक्स की निर्धारित विनिर्माण इकाइयों में निर्मित मलेरिया, HIV तथा HIV/सिफिलिस की त्वरित जांच के लिए इस्तेमाल होने वाली कुछ टेस्ट किटों के संबंध में स्वास्थ्य नियामकों और उपयोगकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया।
संबंधित दस्तावेजों में शामिल प्रमुख उत्पादों के नाम इस प्रकार हैं:
Meriscreen Malaria Pf/Pv Ag
Meriscreen Malaria Pf/Pan Ag
Meriscreen Malaria Pf HRP-II Ag
Meriscreen HIV 1-2 WB
ये उत्पाद WHO की प्रीक्वालिफाइड IVD उत्पादों की सूची से हटाए गए उत्पादों की आधिकारिक सूची में भी दर्ज हैं।
WHO के रिकॉर्ड के अनुसार, संबंधित उत्पादों को 5 जनवरी 2026 को प्रीक्वालिफाइड उत्पादों की सूची से हटा दिया गया था। इसके लिए 19 दिसंबर 2025 को जारी नोटिस ऑफ कंसर्न का उल्लेख किया गया है।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मलेरिया और HIV जैसी बीमारियों की जांच में रैपिड टेस्ट के परिणाम मरीजों की आगे की जांच, उपचार और स्वास्थ्य संबंधी निर्णयों को प्रभावित कर सकते हैं।
इसलिए इन डायग्नोस्टिक उत्पादों की विश्वसनीयता सार्वजनिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है।

नाइजीरिया की नियामक संस्था ने भी जारी की सार्वजनिक चेतावनी
यह अंतरराष्ट्रीय नियामक मामला नाइजीरिया तक भी पहुंचा।
नाइजीरिया की नेशनल एजेंसी फॉर फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन एंड कंट्रोल (NAFDAC) ने 22 फरवरी 2026 को Public Alert No. 010/2026 जारी किया था।
इस चेतावनी में मेरिल डायग्नोस्टिक्स के संबंध में WHO द्वारा जारी नोटिस ऑफ कंसर्न का उल्लेख किया गया। NAFDAC ने संबंधित चिकित्सा उपकरणों की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की तथा स्वास्थ्यकर्मियों, मरीजों और आम नागरिकों को सावधानी बरतने की सलाह दी।
नाइजीरिया की नियामक चेतावनी में मलेरिया और HIV की कुछ निर्धारित टेस्ट किटों का उल्लेख किया गया है। दस्तावेज के अनुसार, संबंधित मार्केटिंग ऑथराइजेशन होल्डर से मिली जानकारी में बताया गया था कि उस समय संबंधित उत्पाद नाइजीरिया में आयात नहीं किए गए थे।
NAFDAC ने यह भी निर्देश दिया कि यदि संबंधित उत्पाद मिलते हैं, तो उनके वितरण, बिक्री या उपयोग से बचा जाए तथा नियामक संस्था को सूचित किया जाए।
हालांकि, यह चेतावनी नाइजीरिया की नियामक संस्था द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र में जारी की गई थी। इसे भारत सरकार द्वारा सभी संबंधित उत्पादों पर प्रतिबंध लगाए जाने का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

WHO की रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण तथ्य भी दर्ज है
निष्पक्ष और तथ्यपरक जांच के लिए WHO के दस्तावेजों में दर्ज सभी महत्वपूर्ण तथ्यों को सामने रखना आवश्यक है।
WHO ने 16 मार्च 2026 की सूचना में बताया कि फिलीपींस स्थित रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर ट्रॉपिकल मेडिसिन में कार्यरत WHO की मलेरिया रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट लॉट टेस्टिंग प्रयोगशाला ने पिछले एक वर्ष के दौरान मेरिल डायग्नोस्टिक्स की मलेरिया RDT किटों के 29 लॉट का मूल्यांकन किया था।
WHO के अनुसार, इन 29 लॉट के परीक्षण में कोई भी लॉट असफल नहीं पाया गया था।
यह तथ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
अर्थात, WHO के दस्तावेजों में एक ओर निर्धारित विनिर्माण इकाइयों की गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली में गंभीर गैर-अनुरूपताओं का उल्लेख है, जबकि दूसरी ओर जांचे गए 29 मलेरिया टेस्ट लॉट के परीक्षण में किसी विफलता की सूचना नहीं दी गई।
इन दोनों तथ्यों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
लॉट परीक्षण में विफलता नहीं मिलने का अर्थ यह नहीं है कि गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली की सभी खामियां दूर हो गई हैं। इसी तरह, गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली में खामियां मिलने का अर्थ यह भी नहीं है कि प्रत्येक टेस्ट किट दोषपूर्ण साबित हुई है।
निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए इस अंतर को स्पष्ट रखना आवश्यक है।

अब भारतीय स्वास्थ्य नियामक तंत्र से किन सवालों के जवाब जरूरी?
वापी स्थित संबंधित विनिर्माण इकाइयों के बारे में WHO के आधिकारिक दस्तावेज सामने आने के बाद यह महत्वपूर्ण सवाल है कि क्या भारतीय नियामक अधिकारियों ने लागू कानूनों और नियमों के तहत इस मामले की समीक्षा की है।
इस संबंध में निम्नलिखित बिंदुओं पर आधिकारिक जानकारी सामने आनी चाहिए।

CDSCO ने क्या कार्रवाई की?
क्या WHO के निष्कर्षों के बाद सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) ने कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा? क्या गुणवत्ता प्रबंधन से संबंधित दस्तावेज या सुधारात्मक कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी गई?
इस संबंध में किसी भी कार्रवाई की पुष्टि आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर की जानी चाहिए।

गुजरात के नियामक अधिकारियों की क्या भूमिका रही?
क्या संबंधित विनिर्माण इकाइयों का निरीक्षण किया गया? यदि कोई जांच रिपोर्ट, कारण बताओ नोटिस, सुधारात्मक निर्देश अथवा अन्य नियामक कार्रवाई की गई है, तो लागू नियमों के अनुसार उसका विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

गुणवत्ता संबंधी खामियों को दूर करने की वर्तमान स्थिति क्या है?
WHO द्वारा दर्ज खामियों को दूर करने के लिए कंपनी ने क्या सुधारात्मक कदम उठाए? क्या सुधारात्मक एवं निवारक कार्रवाई योजना (CAPA) की प्रभावशीलता का मूल्यांकन किया गया? क्या WHO ने नोटिस ऑफ कंसर्न वापस ले लिया है या वह अभी भी प्रभावी है?
इन सवालों के जवाब वर्तमान आधिकारिक रिकॉर्ड से सत्यापित किए जाने चाहिए।

भारतीय बाजार में संबंधित उत्पादों की स्थिति क्या है?
WHO की चेतावनी में उल्लिखित उत्पाद भारत में किन लाइसेंसों के तहत निर्मित और विपणन किए जा रहे हैं? क्या किसी विशेष उत्पाद लॉट के संबंध में अलग से कोई सुरक्षा चेतावनी या नियामक निर्णय जारी किया गया है?
इस संबंध में सक्षम नियामक अधिकारियों से आधिकारिक जानकारी प्राप्त करना आवश्यक है।

सरकारी खरीद और निर्यात से जुड़े क्या तथ्य हैं?
यदि संबंधित उत्पादों का इस्तेमाल सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रमों, अस्पतालों या अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में किया गया है, तो क्या संबंधित खरीद एजेंसियों ने लागू नियमों के अनुसार उनकी गुणवत्ता और उपयोग की समीक्षा की है?
इन सवालों का उत्तर सरकारी खरीद रिकॉर्ड, नियामक पत्राचार और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही दिया जाना चाहिए।
इन सभी प्रश्नों के जवाब संबंधित विभागों के आधिकारिक दस्तावेजों और प्रतिक्रियाओं से ही स्पष्ट हो सकते हैं। केवल WHO की नोटिस के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि भारत में कंपनी के खिलाफ कोई विशेष नियामक कार्रवाई की गई है।

कंपनी का पक्ष और पारदर्शिता की आवश्यकता
सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े इस गंभीर मामले में कंपनी का आधिकारिक पक्ष प्राप्त करना भी आवश्यक है।
कंपनी ने WHO द्वारा दर्ज खामियों के संबंध में क्या स्पष्टीकरण दिया है? क्या सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं? संबंधित उत्पादों की वर्तमान नियामक स्थिति क्या है?
इन सभी सवालों पर कंपनी की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आनी चाहिए।
यह रिपोर्ट उपलब्ध WHO और NAFDAC के आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर तैयार की गई है। इस रिपोर्ट के लिए कंपनी की वर्तमान आधिकारिक प्रतिक्रिया स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं की जा सकी है।
इसलिए यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि कंपनी ने कोई जवाब नहीं दिया या उसने खामियों को दूर करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया।
निष्पक्षता और तथ्यात्मक सटीकता बनाए रखने के लिए कंपनी का पक्ष प्राप्त कर उसे रिपोर्ट के अगले संस्करण में शामिल किया जाना चाहिए।

 

जनस्वास्थ्य का सवाल: नियामक अधिकारी स्थिति स्पष्ट करें
मेडिकल डायग्नोस्टिक्स क्षेत्र में गुणवत्ता और विश्वसनीयता केवल व्यावसायिक विषय नहीं हैं, बल्कि सीधे तौर पर मरीजों की सुरक्षा से जुड़े हैं।
वापी स्थित मेरिल डायग्नोस्टिक्स की निर्धारित विनिर्माण इकाइयों के संबंध में WHO द्वारा दर्ज गंभीर गैर-अनुरूपताओं को देखते हुए भारतीय नियामक अधिकारियों को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या उनके अधिकार क्षेत्र में आवश्यक जांच या समीक्षा की गई है।
यदि कोई नियामक कार्रवाई की गई है, तो उसका कानूनी आधार, वर्तमान स्थिति और सुधारात्मक कदमों की जानकारी पारदर्शी तरीके से सामने आनी चाहिए।
यदि आगे जांच की आवश्यकता है, तो सक्षम अधिकारियों को लागू कानूनों और नियमों के अनुसार इस मामले का मूल्यांकन करना चाहिए।

 

नवोदित विचार समाचार का प्रमुख सवाल है: WHO द्वारा दर्ज खामियों के बाद भारत में कौन-सी आधिकारिक जांच की गई, उसकी वर्तमान स्थिति क्या है और संबंधित डायग्नोस्टिक टेस्ट किटों की गुणवत्ता एवं विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
जनस्वास्थ्य के हित में पारदर्शिता, जवाबदेही और सत्यापित तथ्यों पर आधारित कार्रवाई आवश्यक है।

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