सरिगाम GIDC में ORBIT EXPORTS LTD. की चिमनी से बार-बार निकल रहा काला धुआं! पर्यावरण से खिलवाड़ पर GPCB कब करेगा सख्त कार्रवाई?

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Sarigam: Reporter Bashir pathan

काले धुएं से वायु प्रदूषण और जनस्वास्थ्य पर गंभीर खतरे की आशंका; कंपनी की प्रदूषण नियंत्रण प्रणाली की तकनीकी जांच, उत्सर्जन के नमूनों की जांच और नियमों के उल्लंघन पर कठोर कार्रवाई की मांग

वलसाड जिले के उमरगाम तालुका स्थित सरिगाम GIDC औद्योगिक क्षेत्र में औद्योगिक प्रदूषण का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। सरिगाम GIDC के प्लॉट नंबर 13 से 20 पर स्थित ORBIT EXPORTS LTD. की चिमनी से बार-बार काला धुआं निकलने का आरोप लगाया गया है। इस संबंध में उपलब्ध बताए जा रहे फोटो और वीडियो के आधार पर मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (GPCB) से नियमानुसार सख्त कार्रवाई करने की मांग उठाई गई है।
आवेदक अनीश आई. शेख के अनुसार, कंपनी की चिमनी से काला धुआं निकलने की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए यह जांच आवश्यक है कि कंपनी में कौन-कौन से प्रदूषण नियंत्रण उपकरण लगाए गए हैं, वे वास्तव में काम कर रहे हैं या नहीं और चिमनी से निकलने वाला उत्सर्जन निर्धारित पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप है या नहीं।
सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि यदि किसी औद्योगिक इकाई से बार-बार काला धुआं निकलने की शिकायत सामने आ रही है, तो संबंधित विभाग द्वारा इसकी तकनीकी जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की जाती?

काला धुआं केवल धुआं नहीं, पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए भी खतरा!

औद्योगिक चिमनियों से निकलने वाला काला धुआं कई परिस्थितियों में ईंधन के अपूर्ण दहन, कालिख, धूलकणों और अन्य प्रदूषकों की मौजूदगी का संकेत हो सकता है। हालांकि, ORBIT EXPORTS LTD. से निकलने वाले धुएं में कौन-कौन से प्रदूषक मौजूद हैं और उनका स्तर कितना है, इसकी पुष्टि अधिकृत तकनीकी जांच से ही हो सकती है।
यदि औद्योगिक उत्सर्जन में सूक्ष्म कण, कालिख और अन्य हानिकारक प्रदूषक निर्धारित सीमा से अधिक हों, तो इससे वायु गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। ऐसे प्रदूषकों के संपर्क में आने से सांस संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं तथा पहले से अस्थमा या फेफड़ों की बीमारी से प्रभावित लोगों को विशेष परेशानी हो सकती है। प्रदूषण की प्रकृति और मात्रा के आधार पर इसके प्रभाव आसपास के निवासियों, श्रमिकों, बच्चों और बुजुर्गों पर भी पड़ सकते हैं।
इसके अलावा, वायु प्रदूषण से आसपास के पर्यावरण, वनस्पति और पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। इसलिए चिमनी से निकलने वाले काले धुएं की शिकायत को केवल सामान्य औद्योगिक गतिविधि मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी केवल सरकारी विभागों की नहीं, बल्कि प्रत्येक औद्योगिक इकाई की भी है।

GPCB की तकनीकी जांच जरूरी: आखिर काले धुएं का कारण क्या है?

औद्योगिक इकाइयों में काला धुआं निकलने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें ईंधन का अपूर्ण दहन, बॉयलर या भट्ठी की खराब कार्यप्रणाली, उपकरणों का उचित रखरखाव न होना अथवा प्रदूषण नियंत्रण प्रणाली का प्रभावी ढंग से काम नहीं करना शामिल हो सकता है।
हालांकि, ORBIT EXPORTS LTD. के मामले में वास्तविक कारण क्या है, यह बिना तकनीकी जांच के तय नहीं किया जा सकता।
इसलिए GPCB की अधिकृत टीम द्वारा कंपनी परिसर का निरीक्षण कर निम्नलिखित बिंदुओं की जांच किए जाने की मांग की गई है:
चिमनी से निकलने वाले धुएं और उत्सर्जन की वास्तविक स्थिति की जांच की जाए।
आवश्यकतानुसार अधिकृत तकनीकी पद्धति से उत्सर्जन के नमूने लेकर परीक्षण कराया जाए।
कंपनी में स्थापित बॉयलर, भट्ठी और अन्य संबंधित उपकरणों की कार्यप्रणाली की जांच की जाए।
कंपनी में स्थापित प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों की जानकारी और उनकी वर्तमान कार्यशील स्थिति की पुष्टि की जाए।
ईंधन के प्रकार, खपत और दहन प्रक्रिया से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जाए।
कंपनी की पर्यावरणीय स्वीकृतियों, संचालन संबंधी सहमति और लागू शर्तों के अनुपालन की समीक्षा की जाए।

कंपनी में कौन-सी प्रदूषण नियंत्रण प्रणाली है? जांच में सामने आना चाहिए सच!

औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन प्रक्रिया और उत्सर्जन की प्रकृति के अनुसार अलग-अलग प्रदूषण नियंत्रण प्रणालियां स्थापित की जा सकती हैं। इनमें बैग फिल्टर, मल्टी-साइक्लोन डस्ट कलेक्टर, इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रीसिपिटेटर (ESP) और कुछ प्रकार के प्रदूषकों को नियंत्रित करने के लिए स्क्रबर जैसी तकनीकें शामिल हैं।
लेकिन केवल प्रदूषण नियंत्रण उपकरण स्थापित कर देना पर्याप्त नहीं है। उनका नियमित रखरखाव, उचित संचालन और निर्धारित पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप उत्सर्जन सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
यदि किसी कंपनी में प्रदूषण नियंत्रण उपकरण लगाए गए हैं, तो यह भी जांचना आवश्यक है कि वे उत्पादन के दौरान लगातार और प्रभावी ढंग से काम कर रहे हैं या नहीं। संबंधित रिकॉर्ड, रखरखाव रजिस्टर, उपकरणों की कार्यशील स्थिति और उत्सर्जन परीक्षण के परिणाम इस मामले में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
इसलिए GPCB को ORBIT EXPORTS LTD. में उपलब्ध प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था का वास्तविक निरीक्षण कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि कंपनी पर्यावरणीय नियमों का पालन कर रही है या नहीं।

GPCB की पिछली जांच और निर्देशों के बावजूद ORBIT EXPORTS LTD. पर प्रदूषण फैला रही हे  क्या कंपनी को सरकारी कार्रवाई का भी डर नहीं? बे खौफ होके पर्यावरण को पोहचा रहे हे नुकसान अब निर्देश नहीं कड़क कार्यवाही की मांग 

सरिगाम GIDC स्थित ORBIT EXPORTS LTD. को लेकर एक बार फिर पर्यावरण प्रदूषण का मुद्दा सामने आया है। मिली जानकारी के अनुसार, संबंधित कंपनी के परिसर में पहले भी गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (GPCB) द्वारा जांच की गई थी और कंपनी को निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद यदि कंपनी की चिमनी से बार-बार काला धुआं निकलने की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो यह गंभीर जांच का विषय है कि पूर्व में दिए गए निर्देशों का कितना पालन हुआ और प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था वास्तव में प्रभावी है या नहीं।
सवाल यह है कि यदि GPCB पहले ही जांच कर निर्देश दे चुका है, तो उसके बाद कंपनी की गतिविधियों की निगरानी किस तरह की गई? क्या पुराने निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित किया गया? और यदि नियमों का उल्लंघन जारी है, तो अब GPCB सरिगाम द्वार योग्य कार्यवाही कर कम्पनी को सबक सिखाया जाय जिसे अन्य कम्पनी संचालक ऐसा करने से भी सोचे !

पर्यावरण की सुरक्षा किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे समाज का सवाल है। यदि औद्योगिक प्रदूषण की शिकायतें सामने आती हैं, तो उनका निष्पक्ष, पारदर्शी और साक्ष्य-आधारित निस्तारण होना चाहिए।

 

 

 

 

 

 

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