उमरगाम तालुका के औद्योगिक क्षेत्र से एक बड़ा सवाल सामने आ रहा है।
गायत्री शक्ति पेपर मिल के सामने सड़क किनारे कंपनी से जुड़े वाहनों की लंबी कतार दिखाई दे रही है। इनमें दोपहिया वाहन, चार पहिया वाहन, ऑटो रिक्शा सहित अन्य वाहन भी शामिल हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि कंपनी परिसर के अंदर पार्किंग की व्यवस्था उपलब्ध है, तो कंपनी के वाहन बाहर सार्वजनिक सड़क किनारे क्यों खड़े किए जा रहे हैं?
क्या संबंधित कंपनी को अपने कर्मचारियों और व्यावसायिक वाहनों के लिए पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था नहीं करनी चाहिए?
तस्वीरों में साफ दिखाई दे रहा है कि कंपनी के सामने सड़क किनारे बड़ी संख्या में वाहन खड़े हैं। यदि यह क्षेत्र नोटिफाइड एरिया के अंतर्गत आता है, तो संबंधित अधिकारियों को यह जांच करनी चाहिए कि यहां सार्वजनिक सड़क पर इस तरह पार्किंग की अनुमति है या नहीं।
मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 122 के तहत सार्वजनिक स्थान पर यातायात में बाधा उत्पन्न करने वाली पार्किंग के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है।
ऐसे में GIDC प्रशासन, नोटिफाइड एरिया के अधिकारियों और ट्रैफिक विभाग से मांग है कि मौके पर जांच की जाए। यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो नियमानुसार जुर्माना वसूलने के साथ कानूनी कार्रवाई भी की जाए।
- सवाल सिर्फ गायत्री शक्ति पेपर मिल का नहीं, बल्कि औद्योगिक क्षेत्रों में नियमों के पालन का है।
जब आम नागरिक के लिए पार्किंग के नियम हैं, तो बड़ी कंपनियों पर भी वही नियम लागू होने चाहिए।
नियमों के तहत जुर्माना वसूला जाए और सरकारी राजस्व में जमा होने वाली राशि का उपयोग जनहित में हो।



