
गायत्री शक्ति पेपर मिल के वेस्ट गोदाम से उठ रही असहनीय दुर्गंध! ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा?
कागज के गीले वेस्ट के बड़े-बड़े ढेर पर उठे सवाल, दुर्गंध से परेशान ग्रामीणों ने जांच और उचित निस्तारण की मांग की
औद्योगिक विकास के नाम पर ग्रामीणों के स्वास्थ्य और पर्यावरण से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं! आखिर प्रदूषण नियंत्रण विभाग कब करेगा कार्रवाई?
उमरगाम। सारीगाव તા: 31/10/2026
उमरगाम तालुका के सरिगाम औद्योगिक क्षेत्र में स्थित गायत्री शक्ति पेपर मिल के वेस्ट गोदाम को लेकर स्थानीय स्तर पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों की शिकायत है कि कंपनी के वेस्ट गोदाम से लगातार असहनीय दुर्गंध फैल रही है, जिससे आसपास रहने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस दुर्गंध के कारण उनका सामान्य जनजीवन प्रभावित हो रहा है और स्वास्थ्य को लेकर भी चिंताएं बढ़ रही हैं।
मौके से सामने आई तस्वीरों में एक बड़े शेड के अंदर कागज के वेस्ट का भारी मात्रा में संग्रह दिखाई दे रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इस वेस्ट को किस प्रकार संग्रहित किया जा रहा है? क्या इसके लिए निर्धारित पर्यावरणीय नियमों का पालन किया जा रहा है? क्या दुर्गंध को नियंत्रित करने के लिए कंपनी के पास कोई प्रभावी व्यवस्था है?
क्या कागज के वेस्ट का खुले में इस तरह संग्रह करना उचित है?
पेपर मिल की उत्पादन प्रक्रिया में कागज के टुकड़े, फाइबर अवशेष, पल्प स्लज और ETP स्लज सहित अलग-अलग प्रकार का वेस्ट निकल सकता है। हालांकि, तस्वीरों में दिखाई दे रहे वेस्ट की वास्तविक प्रकृति और उसकी श्रेणी की पुष्टि वैज्ञानिक जांच के बाद ही हो सकती है।
यदि वेस्ट में नमी और जैविक पदार्थ मौजूद हों तथा उसका उचित प्रबंधन नहीं किया जाए, तो उसमें सड़न और सूक्ष्मजीवों की गतिविधियों के कारण दुर्गंध पैदा हो सकती है।
लगातार दुर्गंध के संपर्क में रहने से लोगों को सिरदर्द, जी मिचलाना, आंखों और नाक में जलन तथा सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हालांकि, इस स्थान पर कौन-से प्रदूषक मौजूद हैं और उनका स्वास्थ्य पर कितना प्रभाव पड़ रहा है, इसकी पुष्टि वैज्ञानिक परीक्षण से ही संभव है।
कंपनी प्रबंधन की जिम्मेदारी आखिर कौन तय करेगा?
किसी भी औद्योगिक इकाई को उत्पादन करने और व्यवसाय चलाने का अधिकार है, लेकिन पर्यावरण संरक्षण और आसपास रहने वाले नागरिकों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
कंपनी से निकलने वाले प्रत्येक प्रकार के वेस्ट का उचित वर्गीकरण, सुरक्षित संग्रहण, परिवहन और अधिकृत व्यवस्था के माध्यम से निस्तारण होना आवश्यक है।
ऐसे में सवाल यह है कि क्या गायत्री शक्ति पेपर मिल द्वारा अपने वेस्ट के संग्रहण और निस्तारण के लिए निर्धारित पर्यावरणीय शर्तों का पालन किया जा रहा है?
GPCB अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग
इस पूरे मामले में गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (GPCB) के अधिकारियों द्वारा तत्काल स्थल निरीक्षण किए जाने की आवश्यकता है।
जांच के दौरान निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए:
गोदाम में संग्रहित वेस्ट की वास्तविक प्रकृति और श्रेणी की जांच की जाए।
वेस्ट में नमी और दुर्गंध पैदा करने वाले तत्वों का प्रयोगशाला परीक्षण कराया जाए।
वेस्ट के संग्रहण के लिए आवश्यक अनुमति और पर्यावरणीय शर्तों की जांच हो।
वेस्ट का निस्तारण किस अधिकृत एजेंसी के माध्यम से किया जाता है, इसकी जानकारी ली जाए।
वेस्ट के उत्पादन, संग्रहण, परिवहन और निस्तारण का रिकॉर्ड जांचा जाए।
गोदाम में दुर्गंध नियंत्रण, वेंटिलेशन और बारिश के पानी से बचाव की व्यवस्था की जांच हो।
आसपास के क्षेत्र की वायु गुणवत्ता और दुर्गंध पैदा करने वाली गैसों का वैज्ञानिक परीक्षण कराया जाए।
कंपनी की Consent to Operate (CTO) और पर्यावरणीय अनुपालन रिपोर्ट की जांच की जाए।
अब GPCB की कार्रवाई का इंतजार!
स्थानीय लोगों की शिकायतों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या संबंधित विभाग गायत्री शक्ति पेपर मिल के वेस्ट गोदाम की निष्पक्ष जांच करेगा? क्या ग्रामीणों के स्वास्थ्य और पर्यावरण को प्राथमिकता देते हुए उचित कदम उठाए जाएंगे?
नवोदित विचार समाचार का सवाल: उद्योगों को उत्पादन और मुनाफा कमाने का अधिकार है, लेकिन क्या इसकी कीमत आसपास के ग्रामीणों को दुर्गंध और संभावित स्वास्थ्य समस्याओं के रूप में चुकानी चाहिए? पर्यावरण संरक्षण कंपनी की जिम्मेदारी है, इसे नजरअंदाज क्यों किया जाए?


