
बैंक ऑफ महाराष्ट्र और बैंक ऑफ बड़ौदा का करोड़ों रुपये का भुगतान 30 दिनों से अधिक समय से लंबित; कंपनी ने शेयर बाजार को दी आधिकारिक जानकारी
वापी/मुंबई : editor Anish shekh
गुजरात के वापी में उत्पादन इकाई संचालित करने वाली मंगलम ड्रग्स एंड ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (Mangalam Drugs & Organics Limited) की वित्तीय स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कंपनी ने शेयर बाजार को दी गई अपनी आधिकारिक जानकारी में दो सरकारी बैंकों के ऋण भुगतान में 30 दिनों से अधिक की देरी और डिफॉल्ट होने की जानकारी दी है।
कंपनी द्वारा 16 अक्टूबर 2026 को SEBI के लिस्टिंग नियमों के तहत BSE और NSE को दी गई जानकारी के अनुसार, 15 अक्टूबर 2026 तक दोनों बैंकों की कुल ₹15.57 करोड़ की राशि बकाया थी।
किस बैंक का कितना पैसा बकाया?
कंपनी की आधिकारिक एक्सचेंज फाइलिंग में दी गई जानकारी के अनुसार:
1. बैंक ऑफ महाराष्ट्र
बकाया राशि: ₹9.51 करोड़
2. बैंक ऑफ बड़ौदा
बकाया राशि: ₹6.06 करोड़
दोनों बैंकों की कुल बकाया राशि ₹15,57,27,000 बताई गई है। कंपनी के अनुसार, यह भुगतान 30 दिनों से अधिक समय से लंबित था।
एक साल से अधिक समय तक भुगतान क्यों नहीं?
इस मामले में सबसे गंभीर बात यह है कि कंपनी की जानकारी के अनुसार बैंक ऑफ महाराष्ट्र के खाते में डिफॉल्ट की शुरुआत 17 अक्टूबर 2025 से और बैंक ऑफ बड़ौदा के खाते में 20 अक्टूबर 2025 से हुई थी।
इसके बावजूद अक्टूबर 2026 तक बकाया राशि का मामला सामने आना कंपनी की वित्तीय स्थिति और बैंक ऋण प्रबंधन पर सवाल खड़े करता है।
कंपनी ने अपने खुलासे में यह भी कहा है कि बकाया राशि के भुगतान के लिए आवश्यक व्यवस्था की जा रही है।
क्या बैंकों ने शुरू की वसूली की कार्रवाई?
अब बड़ा सवाल यह है कि करोड़ों रुपये का भुगतान लंबे समय से लंबित रहने के बावजूद दोनों बैंकों ने इस मामले में क्या कदम उठाए हैं? क्या संबंधित बैंक खातों को NPA घोषित किया गया है? क्या ऋण वसूली के लिए कोई विशेष कार्रवाई शुरू की गई है?
इन सवालों पर बैंक ऑफ महाराष्ट्र, बैंक ऑफ बड़ौदा और कंपनी प्रबंधन की आधिकारिक स्थिति सामने आना जरूरी है।
कंपनी प्रबंधन से जवाब अपेक्षित
वापी में उत्पादन इकाई रखने वाली कंपनी के वित्तीय लेन-देन और बैंक ऋण की स्थिति को लेकर निवेशकों तथा संबंधित पक्षों के बीच पारदर्शिता आवश्यक है।
कंपनी द्वारा शेयर बाजार को दी गई जानकारी के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रबंधन कब तक बकाया राशि का भुगतान करता है और दोनों बैंक आगे क्या कदम उठाते हैं।
करोड़ों रुपये का बैंक कर्ज लंबे समय तक बकाया रहना कोई सामान्य बात नहीं है। अब सवाल सिर्फ भुगतान का नहीं, बल्कि कंपनी की वित्तीय जवाबदेही और बैंकिंग व्यवस्था की निगरानी का भी है।


